डेगू बीमारी के खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले भर में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डा. जसबीर सिंह औलख ने कहा कि इस मौसम में वेक्टर जनित (मच्छर जनित बीमारियों) से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की एंटी-लार्वा टीमें डेगू के मामलों की खोज करने और उनके प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए घर-घर सर्वेक्षण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डेगू बुखार एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से होता है, जो साफ खड़े पानी में पैदा होता है। इससे बचाव के लिए घरों में लगे कूलरों मे पानी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए और उसे सप्ताह में एक बार साफ कर सुखा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि डेंगू का मच्छर घरों की छतों पर पड़े गमलों, रेफ्रिजरेटर ट्रे, पानी की टंकियों और टूटे हुए बर्तनों और टायरों मे पैदा होता है। डेंगू बुखार के लक्षणों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी होना, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना आदि प्रमुख है। हालत बिगड़ने पर मसूड़ों और नाक से खून आना शरीर के आंतरिक अंगों में रक्त स्राव हो सकता है। डेंगू से बचाव के लिए शरीर को ढंक कर रखने वाले कपड़े पहने चाहिए, रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए, मच्छर भगाने वाली क्रीम, उपकरण और मच्छर भगाने वाली दवाएं रखनी चाहिए। डेंगू के लक्षण सामने आने पर तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्र पर अथवा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और स्व चिकित्सा से बचना चाहिए।