पार्टी का फोकस संगठन को मजबूत करने पर
अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव को ध्यान में रखकर कार्यकारिणी का गठन किया जा रहा है। पार्टी चुनाव में जीत के लिए जमीन तैयार करने की जिम्मेवारी नई टीम होगी। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए अगले साल के अंत में होने वाला नगर निगम चुनाव काफी अहम है।
हर गुट बढ़ाना चाहता है अपना दबदबा
इस साल 14 जनवरी को जितेंद्र मल्होत्रा को फिर से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी दी गई है। भाजपा के सीनियर नेताओं में भारी गुटबाजी है। हर गुट अपने-अपने समर्थक नेताओं को कार्यकारिणी में शामिल करके अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है।
इस समय पाटी में संजय टंडन, पूर्व अध्यक्ष अरुण सूद, पूर्व सांसद किरण खेर और सत्यापल जैन का गुट है। राज्यसभा सदस्य सतनाम संधू की भी सक्रियता बढ़ने से कई नेता और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ रहे हैं। इससे पहले प्रशासन की ओर से गठित सलाहकार परिषद में पूर्व सांसद सत्यपाल जैन,संजय टंडन और अरुण सूद को जगह नहीं मिली है।
कार्यकारिणी की घोषणा के बाद गुटबाजी बढ़ने की उम्मीद है। इस समय नगर निगम में भाजपा का मेयर बनने के बावजूद प्रशासन अतिरिक्त फंड देने के लिए तैयार नहीं है जिस कारण विपक्ष के साथ-साथ भाजपा के पार्षद भी प्रशासन की कारगुजारी पर सवाल उठा रहे हैं।
जिला अध्यक्ष के लिए नए चेहरों को मौका
प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले जिला अध्यक्षों का चुनाव हो चुका है। इस बार पार्टी ने सभी जिला अध्यक्ष के लिए नए चेहरों को मौका दिया है। इसलिए ही कयास लगाए जा रहे है कि प्रदेश कार्यकारिणी में भी ऐसा देखा जा सकता है। जबकि पूर्व जिला अध्यक्षों को भी पार्टी ने अभी नई जिम्मेवारी नहीं दी है।
इसके अलावा कई और नेता भी है जो कि नए रोल का इंतजार कर रहे हैं। मालूम हो कि आम आदमी पार्टी ने भी नए सिरे से मेयर चुनाव से पहले नए अध्यक्ष के साथ-साथ संगठन का गठन किया है। जबकि कांग्रेस भी आने वाले दिनों में अपनी प्रदेश कार्यकारिणी में भी कुछ बदलाव करने जा रही है।
महासचिव पद के लिए खूब हो रही है लॉबिंग
प्रदेश कार्यकारिणी में महासचिव का पद हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा लॉबिंग हो रही है। पार्टी में अध्यक्ष के बाद महासचिव का पद सबसे अहम माना जाता है। पार्टी के संचालन की जिम्मेवारी महासचिव पर ही होती है। संविधान के अनुसार दो महासचिव की नियुक्त होती है।
इस पद के लिए पूर्व मेयर रविकांत शर्मा, शक्तिदेव शाली, अमित जिंदल, संजीव राणा, अवि भसीन सहित कई नेताओं को दावेदार बताया जा रहा है। जबकि छह उपाध्यक्ष और छह प्रदेश सचिव की नियुक्त होती है।
इसके अलावा कोषाध्यक्ष, प्रवक्ता, सह प्रवक्ताओं और कार्यालय सचिव की नियुक्ति की जाती है। इसके साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी के करीब 100 सदस्य अलग से नियुक्त किए जाते हैं । इसके साथ ही महिला मोर्चा और युवा मोर्चा के अध्यक्ष की घोषणा नए सिरे से की जाएगी।