
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा कर दी है। इसके बाद अब भारत सरकार का रिएक्शन सामने आया है। सरकार ने कहा है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सभी देशों के सामानों पर नए बेसलाइन 10% टैरिफ और भारत पर 27% रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के प्रभावों की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है।
साथ ही सरकार अमेरिकी व्यापार नीति में इस विकास के कारण उत्पन्न होने वाले अवसरों का अध्ययन कर रही है।
क्या है भारत सरकार का अगला प्लान?
एक बयान में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह भारतीय इंडस्ट्री और निर्यातकों सहित सभी हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है, टैरिफ के उनके आकलन पर प्रतिक्रिया ले रहा है और विकसित भारत के नजरिए को ध्यान में रखते हुए स्थिति का आकलन कर रहा है।
इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की 13 फरवरी की ‘मिशन 500′ घोषणा का जिक्र किया गया है, जिसमें 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 500 बिलियन डॉलर करने की बात कही गई है। बयान में कहा गया है कि भारतीय और अमेरिकी व्यापार दल पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते के जल्द समापन के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसमें आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को गहरा करने सहित आपसी हितों के कई मुद्दे शामिल हैं।’
भारत ने कहा-कोई बड़ा झटका नहीं
बयान में आगे कहा गया है कि बातचीत दोनों देशों को व्यापार, निवेश बढ़ाने में सक्षम बनाने पर केंद्रित थी। हम इन मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में इन्हें आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।’ सरकार ने ये भी कहा कि ये भारत के लिए ये कोई बड़ा झटका नहीं है। वह इसे आपदा में अवसर के तौर पर लेगा, वह अमेरिकी व्यापार नीति में आए भारी बदलाव में उत्पन्न होने वाले अवसरों का अध्ययन कर रहा है।
भारत 21वीं सदी के लिए सैन्य साझेदारी और प्रौद्योगिकी (कॉम्पैक्ट) के लिए भारत-अमेरिका से प्रेरित अवसरों को लागू करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापार संबंध आपसी समृद्धि का आधार बने रहें और दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए परिवर्तनकारी बदलाव आ सकें।