भारत-पाक सीमा पर तनाव के बाद जिंदगी फिर पटरी पर दौड़ने लगी है। शनिवार सायं दोनों देशों के बीच सीजफायर के साथ ही सीमांत गांवों में हलचल शुरू हो गई।
रविवार सुबह होते-होते कई गांवों में लोग बच्चों व घरेलू सामान के साथ लौट आए। कोई ट्रक में सामान भरकर आया तो कोई ट्राली में मवेशियों को लेकर लौटा। ये लोग घर का काफी सामान अभी अपने साथ नहीं लाए हैं। इनका कहना है कि पाकिस्तान का भरोसा नहीं है। उन्हें शांति के माहौल में अपने घर लौटने की प्रसन्नता जरूर है।
रविवार को जिला फिरोजपुर के सीमांत गांवों का दौरा किया। सबसे पहले सतलुज दरिया में लकड़ी के बेड़े में महिलाएं व बच्चे दिखाई दिए जो सीमा पर तनाव के बाद अपने रिश्तेदारों के पास चले गए थे। रविवार को अपने गांव टेंडीवाला व कमालेवाला लौटे।
‘हरकतों से बाज नहीं आने वाला पाकिस्तान’
महिलाओं ने कहा कि सीजफायर से कुछ राहत तो मिली है, पर खतरा पूरा टला नहीं है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। निशा रानी ने कहा कि सीजफायर से वह बहुत खुश है। अब वह रोजाना की तरह अपना कामकाज व पढ़ाई पर ध्यान दे पाएगी। युद्ध की स्थिति के कारण वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। तीन दिन से रिश्तेदारों के घर में रह रही थी।
गांव जल्लोके चौक पर पकौड़े की दुकान पर सरहदी गांवों हजारा सिंह वाला, जल्लोके, कामल वाला, भानेवाला, खुंदड़ गट्टी व गट्टी राजोके के बलबीर सिंह, विक्रम सिंह, दलेर सिंह, नछत्तर सिंह व अन्य चर्चा करते दिखे। गांव टेंडीवाला के सुखदेव सिंह ने कहा कि सीजफायर से राहत महसूस हो रही है।
सुबह से ही वह अपने धान की पनीरी की बिजाई को लेकर खेत जोत रहे हैं। आज वह अपनी सरहद के बिल्कुल नजदीक की जमीन पर भी गए थे और काम करके लौटे।
गलियों में खेलते नजर आए बच्चे
जिला फाजिल्का के सीमावर्ती गांव घड्डूमी, महार खीवा, पक्का चिश्ती का दौरा करने पर पिछले दिनों की तुलना में यहां माहौल बदला नजर आया। खेतों में किसान अगली फसल की तैयारी में जुटे दिखे तो गलियों में बच्चे खेल रहे थे। जब टीम गांव पक्का चिश्ती पहुंची तो चौक पर पंक्चर की दुकान पर भीड़ मिली। किसान इंकलाब गिल ने कहा कि जब सीमा पर गड़बड़ी हुई तो चिंता जरूर हुई, पर खेती नहीं रुकी।
अब हमें पनीरी की बिजाई करनी है। तीन-चार दिन हमने हाथ रोके रखे। जब सीजफायर की घोषणा हो गई है तो हमें किसी बात का डर नहीं। हम अपने हल से देश का हौसला जोतते हैं। गांव कबूल शाह के गुरप्रीत सिंह ने बताया कि पक्का चिश्ती में उनका रिश्तेदार सुखविंदर सिंह रहता है।
उसका पशुपालन का काम है। जैसे ही तनाव बढ़ा, उसने फोन करके कहा कि मवेशियों की संभाल जरूरी है और बिना देर किए ट्राली लेकर पहुंच गया और मवेशियों को अपने गांव ले गया। अब हमारे गांव में फिर से शांति है। बीती रात एक भी संदिग्ध आवाज नहीं आई, न कोई हलचल हुई। सुबह ही मैं पशुओं को लादकर लौट आया हूं।