पंजाब की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। इस बार केंद्र में हैं लोकसभा के चर्चित सांसद और Waris Punjab De संगठन से जुड़े अमृतपाल सिंह, जो इस वक्त NSA के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। अब जब अमृतसर के तरनतारन जिले में विधानसभा उपचुनाव (Bypoll) की आहट है, तो अमृतपाल की पार्टी ने इस सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
तरनतारन में यह सीट Aam Aadmi Party (AAP) के विधायक कश्मीर सिंह सोहल के 27 जून को निधन के बाद खाली हुई है। अब इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा भले ही औपचारिक रूप से बाकी हो, लेकिन चुनावी माहौल बन चुका है — और सबसे बड़ा कारण है खालिस्तान समर्थक माने जाने वाले सांसद अमृतपाल की संभावित राजनीतिक एंट्री।
खडूर साहिब के वोटबैंक से जुड़ी है तरनतारन सीट
यह सीट खडूर साहिब लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से अमृतपाल सिंह ने बतौर निर्दलीय सबसे ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। तरनतारन विधानसभा क्षेत्र से उन्हें अकेले 40.79% यानी 44,703 वोट मिले थे। इस क्षेत्र में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस, दोनों का ग्राफ उस वक्त बेहद कमजोर नजर आया।
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कांग्रेस को 20,193 वोट
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AAP को सिर्फ 18,298 वोट
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जबकि जेल में बंद अमृतपाल को 44,703 वोट
अब जब उनकी पार्टी ने यहां उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, तो यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का नहीं बल्कि पंजाब की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला “Political Litmus Test” बन चुका है।
क्यों सबसे अहम है यह उपचुनाव?
1️⃣ Jailed yet Most Voted MP:
अमृतपाल ने चुनाव प्रचार नहीं किया, कोई कैडर नहीं, कोई पार्टी सिंबल नहीं — इसके बावजूद वह 1.79 लाख वोटों से जीत गए। पूरे पंजाब में किसी भी उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीत रही।
2️⃣ Political Sympathy & Religious Sentiment:
उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें Panthak Support और राजनीतिक सहानुभूति मिली। खासकर बेअदबी और गोलीकांड के पुराने जख्म अब भी सिख वोटर्स के ज़ेहन में ताज़ा हैं।
अकाली दल के लिए खतरे की घंटी
पंजाब में पंथक राजनीति की बात करें तो यह अकाली दल की पारंपरिक जमीन रही है। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर सिमट गई। जिनमें से एक विधायक पहले ही AAP में जा चुके हैं, और एक अन्य पार्टी से नाराज हैं।
अब जब अमृतपाल की पार्टी उसी Panthak Base को टारगेट कर रही है, तो अकाली दल की राजनीतिक ज़मीन और खिसक सकती है। यदि Waris Punjab De का उम्मीदवार यह उपचुनाव जीत जाता है, तो यह Shiromani Akali Dal की राजनीतिक वापसी के रास्ते को लगभग बंद कर देगा।
AAP और कांग्रेस के लिए सेमीफाइनल
Aam Aadmi Party (AAP) ने 2022 में 117 में से 92 सीटें जीतकर पंजाब की सत्ता संभाली थी। हाल में हुए लुधियाना और जालंधर उपचुनाव में AAP विजयी रही, लेकिन वहां अमृतपाल जैसा पंथक चेहरा मुकाबले में नहीं था। अब यदि AAP यह चुनाव हारती है, तो यह 2027 की विधानसभा चुनावी चुनौती का संकेत होगा।
वहीं कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। लुधियाना उपचुनाव में यह खुलकर सामने आया जब प्रचार के दौरान सीनियर नेताओं में टकराव देखने को मिला। अगर तरनतारन में भी कांग्रेस को हार मिलती है तो पार्टी के लिए पंजाब की वापसी मुश्किल हो जाएगी।
क्या अमृतपाल की पार्टी बना सकती है नया विकल्प?
Waris Punjab De की ओर से अगर उम्मीदवार यहां चुनाव जीतता है, तो 2027 तक यह संगठन सिख राजनीति में “New Panthic Face” के रूप में उभर सकता है। यह परिणाम न सिर्फ अकाली दल को कमजोर करेगा, बल्कि AAP और कांग्रेस के बीच नया ध्रुव भी खड़ा कर सकता है।
हालांकि अगर यह पार्टी चुनाव हार जाती है, तो यह साफ हो जाएगा कि अमृतपाल की जीत लोकसभा में महज़ sympathy wave पर आधारित थी। इससे यह भी तय होगा कि जेल में बंद रहते हुए वह कितनी दूर तक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion):
तरनतारन का यह उपचुनाव सिर्फ एक विधायक के निधन से खाली हुई सीट का मामला नहीं है, बल्कि यह पंजाब में पंथक राजनीति बनाम विकास की राजनीति, Anti-Incumbency बनाम Sympathy Wave और Traditional Akali Dal बनाम Emerging Waris Punjab De जैसी कई सियासी परतों को सामने लाने वाला है।
हर पार्टी के लिए यह चुनाव 2027 की तैयारी का सेमीफाइनल है। यह उपचुनाव बताएगा कि Punjab की जनता अब भी पुराने चेहरों पर भरोसा करती है या वह एक नए वैचारिक आंदोलन को राजनीति में स्वीकारने के लिए तैयार है।