📍चंडीगढ़ | पंजाब विधानसभा रिपोर्ट
पंजाब विधानसभा का सत्र इस बार भी विवादों और तीखी नोकझोंक से भरपूर रहा। गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के भाषण के दौरान विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा की गई “12 बजे” वाली टिप्पणी ने सदन का माहौल गर्मा दिया। इस एक वाक्य ने न सिर्फ सत्ता पक्ष को नाराज़ किया, बल्कि एक सांस्कृतिक और धार्मिक विवाद की शक्ल भी ले ली।
🕛 क्या था मामला?
जैसे ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में अपना भाषण शुरू किया, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बीच में टोकना शुरू कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री मान ने तंज कसते हुए कहा:
“बाजवा साहब, आपको भी बोलने का मौका मिलेगा क्योंकि अभी तो दिन बहुत है… अभी तो सिर्फ 12 ही बजे हैं।”
इस पर बाजवा ने पलटकर जवाब दिया:
“12 बजे आपके होंगे, हमारे नहीं।”
यही वाक्य बहस और हंगामे का कारण बन गया।
🔥 12 बजे का बयान बना विवाद
सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस टिप्पणी को एक धर्म विशेष पर कटाक्ष के रूप में देखा और जमकर विरोध किया। कुछ विधायकों ने इसे “सिख समुदाय का अपमान” बताते हुए सदन में नारेबाज़ी भी शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाजवा की आलोचना करते हुए कहा:
“असल में इनसे CM की कुर्सी बर्दाश्त नहीं होती। इसलिए ये बार-बार ऐसे बयान देकर माहौल बिगाड़ते हैं।”
🗣️ CM मान का तीखा जवाब
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि:
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“कांग्रेस पार्टी 60 साल से सिर्फ ड्रामा कर रही है।”
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“अब जब जनता ने उन्हें नकार दिया है, तो ये Assembly में शोर मचाकर attention चाहते हैं।”
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“हम लोगों के मुद्दों पर बोल रहे हैं, और ये व्यक्ति-आधारित टिप्पणी कर रहे हैं।”
मान ने विपक्ष से यह भी कहा कि “अगर आप रचनात्मक सुझाव दें, तो सरकार सुनने को तैयार है। लेकिन आप बात को personal और धार्मिक रंग देने लगते हैं, जो गलत है।”
🧑⚖️ Assembly Rules के उल्लंघन का आरोप
AAP विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि बाजवा की टिप्पणी को Assembly Record से हटाया जाए, क्योंकि इससे सांप्रदायिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। हालांकि, इस पर विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अभी सुरक्षित रखा गया है।
👥 सदन में हंगामा, कार्यवाही स्थगित
लगभग 15 मिनट तक सदन में भारी शोर-शराबा होता रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कई विधायकों ने एक-दूसरे पर “आस्थाओं के अपमान” का आरोप लगाया।
स्थिति को बिगड़ते देख विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया।
📌 क्या है ’12 बजे’ टिप्पणी का सामाजिक संदर्भ?
भारत में अक्सर “12 बजे” को लेकर सिख समुदाय के खिलाफ पुराने और अपमानजनक मज़ाक होते रहे हैं। इस कारण कई सिख संगठनों ने समय-समय पर इस तरह की भाषा पर आपत्ति दर्ज की है।
बाजवा की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर AAP समर्थक इसे सिखों के अपमान के रूप में दिखा रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे सीएम मान की ओवर रिएक्शन बता रही है।
🗯️ कांग्रेस का पक्ष
बाजवा समर्थकों का कहना है कि उन्होंने “12 बजे” का उपयोग दिन के सामान्य समय के संदर्भ में किया था, न कि किसी धर्म या समुदाय के प्रति कटाक्ष के रूप में। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि:
“CM Mann बार-बार मुद्दों से भटकाकर हर बात को भावनात्मक रूप देने की कोशिश करते हैं। Assembly में मज़ाक की गुंजाइश रहती है, लेकिन इसे communal नहीं बनाना चाहिए।”
🔎 राजनीतिक विश्लेषण: मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
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CM Mann इस समय केंद्र सरकार और विपक्ष पर कई मोर्चों पर हमला कर रहे हैं — जैसे SYL मुद्दा, BBMB विवाद और शिक्षा सुधार।
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ऐसे में विपक्ष Assembly में शोर और टोकाटाकी करके इन मुद्दों को overshadow करना चाहता है।
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दूसरी तरफ AAP सत्ता पक्ष इसे एक “सम्मान और आस्था का मुद्दा” बनाकर कांग्रेस को घेरना चाहती है।