नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने चुनावी व्यवस्था को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने उन राजनीतिक दलों पर सख्ती की है जो कई सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ रहे थे और जरूरी नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।
474 दलों को लिस्ट से बाहर किया गया
चुनाव आयोग ने बताया कि 18 सितंबर को 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) को सूची से हटा दिया गया है। इससे पहले 9 अगस्त को 334 दलों को हटाया गया था। इस तरह पिछले दो महीनों में कुल 808 दलों को डीलिस्ट कर दिया गया है।
क्यों हटाए गए ये दल?
चुनाव आयोग के अनुसार ये दल लगातार 6 साल से कोई चुनाव नहीं लड़ रहे थे। इन्होंने अपने सालाना खाते और खर्चों की रिपोर्ट जमा नहीं की। 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान 359 दलों ने अपने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनाव खर्च रिपोर्ट नहीं दी। ऐसे में इन दलों को लिस्ट से बाहर करना जरूरी हो गया ताकि केवल सक्रिय और नियमों का पालन करने वाले दल ही चुनाव में हिस्सा ले सकें।
अब कितने राजनीतिक दल बचे?
- पहले देशभर में 2,520 गैर-मान्यता प्राप्त दल थे।
- 808 दल हटने के बाद अब यह संख्या घटकर 2,046 रह गई है।
- इसके अलावा देश में 6 राष्ट्रीय दल और 67 राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल मौजूद हैं।
बिहार चुनाव पर सीधा असर
यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हटाए गए दलों में से 14 दल बिहार से हैं। अब ये दल चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतार पाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम चुनाव को और ज्यादा साफ-सुथरा बनाएगा।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
पहले कई दलों पर इनकम टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग कानून तोड़ने के आरोप लगे थे।
चुनाव आयोग का मानना है कि ऐसे निष्क्रिय या संदिग्ध दलों को हटाना जरूरी है ताकि
- चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी हो, सिर्फ जिम्मेदार दल ही टैक्स छूट जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकें।
फिर से पंजीकरण का विकल्प
जो दल हटाए गए हैं वे चाहें तो फिर से पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करा सकते हैं और भविष्य में चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं।