Sharadiya Navratri 2025: 29 सितंबर 2025, सोमवार को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन को महासप्तमी भी कहा जाता है। यह दिन मां दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि को समर्पित है। मां कालरात्रि का रूप भले ही भयानक दिखता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए बहुत शुभ मानी जाती हैं। सही विधि से पूजा करने पर जीवन से डर, कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है।
कौन हैं मां कालरात्रि?
- मां कालरात्रि, मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली और उग्र रूप हैं।
- इनका रंग गहरे अंधकार जैसा काला है।
- इनके बाल बिखरे हुए और तीन चमकते नेत्र हैं।
- ये गधे (गर्दभ) पर सवार रहती हैं।
- इनके चार हाथ हैं —
- एक हाथ में तलवार (खड्ग)
- दूसरे में लोहे का कांटा
- बाकी दो हाथ वरदान और अभय देने की मुद्रा में।
नाम का अर्थ:
- “काल” का मतलब है मृत्यु और “रात्रि” का मतलब है अंधकार।
- यानी, मां कालरात्रि मृत्यु और अंधकार का अंत करती हैं।
- उनकी पूजा से भय, दुर्घटना और बुरी शक्तियों का नाश होता है।
महासप्तमी पर मां कालरात्रि का प्रिय भोग
धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें बहुत प्रिय हैं। सप्तमी पर इन्हें ये भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है:
- गुड़
- शुद्ध गुड़ का भोग चढ़ाने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं।
- इससे दुख, शोक और कष्ट दूर होते हैं।
- गुड़ के मालपुए या खीर
- गुड़ से बने मालपुए या खीर चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- चना
- गुड़ के साथ चना चढ़ाना भी बहुत शुभ है।
- इससे आत्मविश्वास, साहस और शक्ति मिलती है।
- शहद
- कुछ जगहों पर मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है।
- इससे जीवन में मधुरता, सुख-शांति और समृद्धि आती है।
पूजा विधि: मां कालरात्रि को कैसे प्रसन्न करें?
- सबसे पहले स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल को साफ करें और मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- मां को गंगाजल से स्नान कराएं।
- लाल या नारंगी चुनरी अर्पित करें।
- रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल) और लाल-पीले फूल (जैसे गुड़हल, रातरानी) चढ़ाएं।
- धूप-दीप जलाएं और मां को गुड़, चना या गुड़ से बने पकवान का भोग लगाएं।
- घी का दीपक जलाकर “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
- दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- अंत में पूरे परिवार के साथ मां की आरती करें।