छठ पूजा का महापर्व 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है। आज छठ पूजा का दूसरा दिन है, जिसे खरना कहा जाता है। खरना का दिन छठ व्रत में बहुत खास माना जाता है। इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले) पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं और शाम को विशेष पूजा और प्रसाद के साथ व्रत का पारण करते हैं।
खरना का मतलब क्या होता है?
“खरना” शब्द का अर्थ होता है शुद्धता और पवित्रता। इस दिन व्रती व्यक्ति अपने तन, मन और घर को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखता है। माना जाता है कि इस दिन की शुद्धता ही आगे के दिनों की पूजा को सफल बनाती है।
खरना के दिन प्रसाद कैसे बनता है?
- खरना के दिन मिट्टी के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाया जाता है।
- आम की लकड़ी से चूल्हा जलाया जाता है क्योंकि यह पवित्र मानी जाती है।
- प्रसाद में आमतौर पर गुड़ की खीर (रसोई), रोटी (ठेकुआ) और फल शामिल होते हैं।
- प्रसाद को तैयार करते समय बहुत ध्यान रखा जाता है कि कोई अशुद्ध वस्तु या गंदे हाथ उसमें ना लगें।
खरना की पूजा विधि (Step-by-Step)
- सुबह जल्दी उठें – सबसे पहले घर की सफाई करें।
- नहाकर साफ कपड़े पहनें – दिनभर व्रत रखें।
- शाम को फिर से स्नान करें – स्नान के बाद नई या साफ साड़ी/कपड़े पहनें।
- मिट्टी के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाएं – आम की लकड़ी से आग जलाकर खीर और रोटी तैयार करें।
- छठी मैया को भोग लगाएं – सबसे पहले प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करें।
- व्रत का पारण करें – पूजा के बाद व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।
खरना के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
- गंदे हाथों से पूजा का सामान न छुएं।
पूजा की चीजों को हमेशा हाथ धोकर या स्नान के बाद ही छुएं। - गंदे बर्तन या स्थान का उपयोग न करें।
प्रसाद बनाने की जगह और बर्तन पूरी तरह से साफ होने चाहिए। - साधारण नमक का प्रयोग न करें।
प्रसाद या भोजन में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। - भोग से पहले भोजन न करें।
सूर्य देव और छठी मैया को प्रसाद चढ़ाने के बाद ही परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करें।
खरना का धार्मिक महत्व
खरना को छठ पूजा की आध्यात्मिक शुरुआत माना जाता है। इस दिन व्रती शुद्ध मन से छठी मैया का ध्यान करते हैं और आने वाले दो दिनों की पूजा के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति खरना पूरी श्रद्धा और पवित्रता से करता है, उसकी हर मनोकामना छठी मैया पूरी करती हैं।