पंजाब में पराली जलाने पर सरकार की रोक और सख्त कार्रवाई के बावजूद किसानों द्वारा खेतों में आग लगाने के मामले रुक नहीं रहे हैं। हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि पंजाब में पराली जलाने की क्या स्थिति है और सरकार क्या कर रही है।
पराली जलाने के सबसे ज़्यादा मामले रविवार को दर्ज
रविवार को पंजाब में इस सीजन के सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए। इस दिन कुल 122 नए मामले सामने आए। अब तक पूरे सीजन में कुल 743 मामले दर्ज हो चुके हैं। इससे साफ है कि किसानों के बीच पराली जलाने की प्रवृत्ति अभी भी जारी है।
सरकार की कार्रवाई: जुर्माना, FIR और रेड एंट्री
सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। अब तक किसानों पर कुल 16 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, 266 मामलों में FIR दर्ज की गई है। 296 किसानों की जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। (रेड एंट्री का मतलब है कि सरकार रिकॉर्ड में यह लिख देती है कि किसान ने पराली जलाई थी, जिससे भविष्य में सरकारी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।)
कौन सा जिला सबसे आगे है?
पंजाब का तरनतारन जिला पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है। यहां अब तक 224 मामले दर्ज हुए हैं।
इसके बाद अमृतसर दूसरे नंबर पर है, जहां 154 मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे धान की कटाई तेज होगी, पराली जलाने के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है। सिर्फ पिछले 6 दिनों में ही पंजाब में 328 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
पराली से बिगड़ रहा पंजाब का AQI
पराली जलाने का असर पंजाब के शहरों की हवा पर साफ दिख रहा है। रविवार को पंजाब के कई शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
- जालंधर: 439
- बठिंडा: 321
- लुधियाना: 260
- अमृतसर: 257
- पटियाला: 195
- मंडी गोबिंदगढ़: 153
इन आंकड़ों से पता चलता है कि पराली जलाने से हवा में जहरीले कण बढ़ रहे हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली की खराब हवा में भी पराली का योगदान
दिल्ली की हवा भी इन दिनों बेहद खराब स्थिति में है। कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया है, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है। कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि दिल्ली की जहरीली हवा के पीछे पंजाब और हरियाणा में जल रही पराली एक बड़ी वजह है। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण पहले से ही बढ़ा हुआ था, और सिर्फ पराली को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि जैसे-जैसे फसल कटाई बढ़ेगी, पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ेंगी — जिससे हवा और भी खराब हो सकती है।