Punjab के लुधियाना से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नवविवाहिता (newly married woman) ने अपने ही पति पर शारीरिक उत्पीड़न, धमकी और अश्लीलता फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
📍 कहां और कब हुआ मामला?
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जिला: लुधियाना
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थाना: वुमन सैल
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शिकायत की तारीख: वर्ष 2025
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पीड़िता का नाम: ऊषा देवी
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आरोपी: मोहद फैजल (पति)
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शादी की तारीख: वर्ष 2024 में हुई थी
💔 पीड़िता ने क्या आरोप लगाए?
ऊषा देवी ने अपनी शिकायत में बताया कि
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शादी के कुछ ही दिन बाद पति मारपीट करने लगा।
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उसने मेरी अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं।
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बार-बार जान से मारने की धमकी देने लगा।
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घरेलू हिंसा, मानसिक और शारीरिक शोषण उसकी दिनचर्या बन चुकी थी।
उषा देवी ने कहा,
“मैंने शादी को निभाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब मेरी इज्जत को ही बाजार में उछाल दिया गया, तो मैं चुप नहीं बैठ सकती थी।”
🚨 किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर मनजीत कौर ने बताया कि
पीड़िता की शिकायत की पुष्टि के बाद आरोपी मोहद फैजल के खिलाफ निम्न धाराओं में केस दर्ज किया गया:
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धारा 61 आईटी एक्ट: अश्लील सामग्री प्रसारित करने और डिजिटल माध्यम से अपमान करने पर लागू होती है
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धारा 351 IPC: आपराधिक धमकी और शारीरिक हमला
FIR दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच में जुट गई है।
👮 पुलिस का बयान
थाना वुमन सैल की प्रभारी इंस्पेक्टर मनजीत कौर ने कहा:
“यह मामला गंभीर है। महिला को पूरी सुरक्षा दी जा रही है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाएगा।”
📱 सोशल मीडिया पर वायरल हुईं अश्लील तस्वीरें
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आरोपी ने पीड़िता की कुछ निजी तस्वीरें, जो शायद शादी के पहले या बाद की थीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दीं।
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इन तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करते हुए, महिला की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
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कई अकाउंट्स पर इन फोटोज को टैग और शेयर किया गया।
अब पुलिस डिजिटल एविडेंस एकत्र कर रही है और सोशल मीडिया से तस्वीरें हटवाने की कार्रवाई भी की जा रही है।
🧑⚖️ महिला आयोग और कानून विशेषज्ञों की नजर
इस तरह के मामलों में
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महिला आयोग स्वतः संज्ञान लेकर पीड़िता को कानूनी सहायता प्रदान कर सकता है।
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डिजिटल उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, और मानसिक प्रताड़ना के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है।
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IT एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
💬 सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू
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यह मामला नारी गरिमा और डिजिटल निजता से जुड़ा है।
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शादी के बाद किसी महिला को अगर इस तरह की हिंसा और अपमान का सामना करना पड़े, तो यह मानवाधिकार हनन है।
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ऐसी घटनाएं महिलाओं को बोलने से डराने की कोशिश हैं, लेकिन कानून अब उनके साथ है।
👨👩👧👦 समाज में क्या संदेश?
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महिलाओं को ऐसे मामलों में चुप नहीं बैठना चाहिए।
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पुलिस और कानून अब पहले से ज्यादा सक्रिय और संवेदनशील हैं।
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समाज को ऐसे मामलों में पीड़िता का साथ देना चाहिए, न कि उसे दोषी ठहराना चाहिए।